लोकप्रिय पोस्ट

शनिवार, 17 नवंबर 2012

डॉ  मिथिलेश दीक्षित के हाइकु 

(हिमाचली अनुवाद : अनंत आलोक

हाइकु (यादें )

यादो री पंखो 
ऊँची गोयणी उबी 
सासो रा फंद |

चिते आउंदी 
सुपने भेटो तेरी 
बातो पाछली |

कोबे बिसरो 
मिठडी यादो मुंजे 
जियो रे बंद  |

जिंदडी खिलो 
चितानो रा धोनो मू 
जोबे बे मिलो  |

आवणो लागी
यादो रा दौ रो छाई 
मनो रे गाँव  |

होरिये होरे 
शुको कोबे बेन ई 
यादो रे घाव  |

उओं न केथी 
शील पात्थरो यादो 
तेरी  रो मेरी  |

फोटू शा छोपा 
चिते  आई जोबे बे 
यादो मू तेरी  |

बिंदु बिंदु री 
जोड्यो बाणी मोय
यादो री झील  |

बचपनो री 
सोयली रो साथनी
साथी मोनो री  |

आखी मिचयो 
देखा बचपनो दा
तुलिया मोनो  |

सोमवार, 2 जनवरी 2012

नोआ साल 
नोए जोमाने रा नोआ  साल 
नोए सालो री नोई नोई बातो 
नोई सांडनी टोल मारे
नोई हांडणी  बाटो 
छाड्यो माण मख्ते
चोयनी री जिंदगी काटो
जाणो ए तुंये भिडियो बोलोद
दुइनी की मुंडो फाटो
देसो के मचिये घोर उजाडो
शेटो  कोमाई खातो 
चोरि कोरो आपणी  देई की
कुड्बे रे भाग फाटो
धियो बेटी म्हारे घोरो की ठोगड़ी
एनो पेटो दी न काटो
भोले माणशो  चालो कोबे 
एकी पुडो दी घोरटो
माणशो बोयरी हो आमाण शो  रा
तिडो जियो दी फाटो
रकोश बोणी गिया मानुष
 मुयो देयो लोउ री छाटो||