डॉ मिथिलेश दीक्षित के हाइकु
(हिमाचली अनुवाद : अनंत आलोक
हाइकु (यादें )
यादो री पंखोऊँची गोयणी उबी
सासो रा फंद |
चिते आउंदी
सुपने भेटो तेरी
बातो पाछली |
कोबे बिसरो
मिठडी यादो मुंजे
जियो रे बंद |
जिंदडी खिलो
चितानो रा धोनो मू
जोबे बे मिलो |
आवणो लागी
यादो रा दौ रो छाई
मनो रे गाँव |
होरिये होरे
शुको कोबे बेन ई
यादो रे घाव |
उओं न केथी
शील पात्थरो यादो
तेरी रो मेरी |
फोटू शा छोपा
चिते आई जोबे बे
यादो मू तेरी |
बिंदु बिंदु री
जोड्यो बाणी मोय
यादो री झील |
बचपनो री
सोयली रो साथनी
साथी मोनो री |
आखी मिचयो
देखा बचपनो दा
तुलिया मोनो |