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शनिवार, 17 नवंबर 2012

डॉ  मिथिलेश दीक्षित के हाइकु 

(हिमाचली अनुवाद : अनंत आलोक

हाइकु (यादें )

यादो री पंखो 
ऊँची गोयणी उबी 
सासो रा फंद |

चिते आउंदी 
सुपने भेटो तेरी 
बातो पाछली |

कोबे बिसरो 
मिठडी यादो मुंजे 
जियो रे बंद  |

जिंदडी खिलो 
चितानो रा धोनो मू 
जोबे बे मिलो  |

आवणो लागी
यादो रा दौ रो छाई 
मनो रे गाँव  |

होरिये होरे 
शुको कोबे बेन ई 
यादो रे घाव  |

उओं न केथी 
शील पात्थरो यादो 
तेरी  रो मेरी  |

फोटू शा छोपा 
चिते  आई जोबे बे 
यादो मू तेरी  |

बिंदु बिंदु री 
जोड्यो बाणी मोय
यादो री झील  |

बचपनो री 
सोयली रो साथनी
साथी मोनो री  |

आखी मिचयो 
देखा बचपनो दा
तुलिया मोनो  |